सोमवार, 2 नवंबर 2009

जबाब दो ...........ओ दुनिया वालो



ओ दुनिया वालो .....ओ दुनिया वालो


छोटे से सवाल का ,जुल्म के फैले जाल का ,


इंशा के इस हाल का ,जबाब दो !ओ दुनिया वालो


हाथो में हथियार क्यो -देशो में दिवार क्यो ?


टुकडो में संसार क्यो ,जबाब दो !ओ दुनिया वालो


मुल्को में तकरार क्यो -जलता ये संसार क्यो


हर मजहब बीमार क्यो ,जबाब दो !ओ दुनिया वालो


प्यार की बोली भूल गए सब -चलन चला है गोली का


हर दमन पर लगा हुआ है -रंग खून की होली का


कोई मुझको यह तो बता दे -इतना अत्त्याचार क्यो


नही दिलो में प्यार क्यो ,जबाब दो !दुनिया वालो


बारूदों की बरसातो घायल रोतीहै


गोली चाहे चले जन्हा पर -माँ की ममता रोती है


उजड़ गए उन सभी घरो की -कहा गई आबादिया !


बच्चो की किल्कारिया ,जबाब दो ..ओ ...............


बहन खोजती है भाई को -माँ से बिछुड़ा लाल है


सूनी मांग पर सिसकी लगाती -दुल्हन का यह हाल है


शहर बना है मरघट जैसा ,हर बस्ती बेहाल है !!


बरिष्ठ पत्रकार कवि" श्री दयाराम अटल "के प्रथम काव्य संग्रह "जबाब दो "से साभार ...............


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